✎ SAT-SAAW स्वदेशी तकनीक से निर्मित हथियार है जो वायु सेना की क्षमता बढ़ाएगा और आत्मनिर्भर भारत में सहायक होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ 811 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के अंतर्गत किया गया है, जिसमें कुल लागत 810.79 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। SAT-SAAW एक अत्याधुनिक हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है, जिसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। इसे डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसे उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण किया जाएगा, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसकी आपूर्ति वर्ष 2027-28 और 2028-29 के बीच किए जाने की योजना है, जिससे भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी।
यह घटनाक्रम बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीक और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सरकारी खर्च और रक्षा बजट जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश पड़ता है। इसके अतिरिक्त, यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी सरकारी पहलों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विषय हैं। इसके अलावा, डीआरडीओ, बीडीएल और भारतीय वायु सेना जैसे संगठनों का उल्लेख भी परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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