
✎ निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शिता आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**‘अदृश्य हाथ’: चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने उठाए सवाल**
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) में दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले दस महीनों में कम से कम चौदह बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें से चार आपत्तियां तो एक ही दिन में दर्ज हुईं, जो इस बात का संकेत हैं कि आयोग के फैसलों में पारदर्शिता और सहमति का अभाव रहा। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग में किसी ‘अदृश्य हाथ’ के माध्यम से निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेता मनिष तेवरी ने इसे लेकर कहा कि यदि रिपोर्ट में बताए गए तथ्य सही हैं, तो यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
इस मुद्दे का संबंध बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें शासन व्यवस्था, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे विषय शामिल हैं। परीक्षाओं में ऐसे मामलों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जहां संवैधानिक पदाधिकारियों की भूमिका, उनके कार्यों की वैधता और संस्थागत नैतिकता पर चर्चा की जाती है। इसके अतिरिक्त, चुनाव सुधारों, मतदाता सूची में पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप के मुद्दे भी सामान्य ज्ञान अनुभाग में पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: Hindustan Times
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