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Voter notice process

✎ एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को भेजे जा रहे 30 लाख नोटिसों पर सख्त रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग से अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर सवाल उठाया है। न्यायालय ने प्रक्रिया में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की पहचान के आधार को स्पष्ट करने तथा मतदाताओं को लगभग यांत्रिक तरीके से नोटिस भेजने की प्रथा पर चिंता व्यक्त की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नाम हटाने के लिए निर्धारित 12 दस्तावेजों की मांग से मतदाताओं को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने इसे जनसंख्या वृद्धि के कारण आवश्यक बताया है। इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 14 (समता), 19 (अभिव्यक्ति स्वतंत्रता) और 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है, जिससे इसकी प्रासंगिकता प्रशासनिक न्याय और चुनावी पारदर्शिता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह मुद्दा प्रशासनिक सुधार, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायिक सक्रियता जैसे विषयों के अंतर्गत आता है। बैंकिंग परीक्षाओं में लोकतंत्र के संस्थागत ढांचे, चुनाव आयोग की भूमिका और न्यायपालिका की सक्रियता जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एसएससी परीक्षाओं में संविधान के मौलिक अधिकारों, चुनावी सुधारों और प्रशासनिक पारदर्शिता से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से इस मामले का मूल्यांकन किया जा सकता है। आरबीआई ग्रेड बी में शासन प्रणाली, चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर इस मामले से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

स्रोत: amarujala.com


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