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Netaji’s daughter moves Supreme Court for repatriation of his ashes from Tokyo temple — labelled illustration
3D cutaway: Netaji’s daughter moves Supreme Court for repatriation of his ashes from Tokyo temple Supreme CourtashesTokyo temple
3D cutaway: Netaji’s daughter moves Supreme Court for repatriation of his ashes from Tokyo temple

✎ नेताजी की अस्थियों के प्रत्यावर्तन के लिए सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया और सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री अनिता बोस फाफ ने टोक्यो स्थित रेंको-जी मंदिर में रखी उनकी अस्थियों को भारत वापस लाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। 11 अगस्त, 2026 को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार लंबे समय से इस मामले में कोई निर्णायक फैसला लेने में विफल रही है, जिससे नेताजी के परिवार को अंतिम संस्कार करने का अधिकार नहीं मिल पाया है। नेताजी की मृत्यु 1945 में ताइहोकू (ताइपे) में विमान दुर्घटना में हुई थी, और उनकी अस्थियां टोक्यो लाई गई थीं, जहां वे 80 से अधिक वर्षों से रखी हुई हैं।

इस मामले का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व है, क्योंकि यह भारत-जापान संबंधों और राष्ट्रीय स्मृति के संरक्षण से जुड़ा है। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अंतरराष्ट्रीय संबंधों, संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा, नेताजी का व्यक्तित्व और स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान भी पाठ्यक्रम में शामिल रहता है, जिससे ऐसे मामलों की समझ परीक्षा में सहायक हो सकती है।

स्रोत: The Hindu


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