प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**सीईईडब्ल्यू का अध्ययन: हिमाचल के गांव अपना रहे जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के प्रयास, शिमला में जारी हुई रिपोर्ट**
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश के गांवों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर अनुकूलन के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। यह अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय केंद्र फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (इसीमोड) के सहयोग से किया गया, जिसमें मंडी, कुल्लू, सिरमौर और शिमला जिलों की 12 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि किसान नई फसलों को अपना रहे हैं, जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, और स्थानीय आपदा प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है। शिमला के संधू गांव में 20 से अधिक परिवार प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जबकि कुल्लू के बजौरा में किसानों ने सेब की जगह जापानी फल की खेती शुरू की है। इसी तरह, सिरमौर के परारा में लोगों ने लहसुन को सेब के साथ उगाना शुरू किया है। सीईईडब्ल्यू ने स्ट्रैटेजिक फोरसाइट पद्धति का उपयोग कर 25 अनुकूलन समाधान खोजे हैं, जिन्हें 30 से अधिक सरकारी नीतियों से सहायता मिल सकती है।
इस अध्ययन का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को कवर करता है, जो वर्तमान में सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं का प्रमुख हिस्सा हैं। बैंकिंग क्षेत्र में, जलवायु परिवर्तन से संबंधित जोखिमों के प्रबंधन और हरित वित्तपोषण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में सरकारी पहलों और नीति निर्माण पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, इस अध्ययन से प्राप्त जानकारी ग्रामीण विकास, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। इस प्रकार, यह अध्ययन न केवल पर्यावरणीय स्थिरता बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
स्रोत: amarujala.com
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