

मानचित्र व माइंड-मैप: Underwater cultural heritage sites in India
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
भारत सरकार द्वारा अंतर्जलीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अंतर्जलीय पुरातत्व विभाग द्वारा द्वारका, बेट द्वारका, महाबलीपुरम और कराईकल जैसे प्रमुख स्थलों पर अनुसंधान और अन्वेषण कार्य किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग को पूमपुहार में तथा राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान को बेट द्वारका, छारी और गंगाता बेट में पानी के नीचे खुदाई के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है। एएसआई के अंतर्जलीय पुरातत्व विभाग को वर्ष 2025-26 में 75.40 लाख रुपये आवंटित किए गए थे, जिनमें से 74.91 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि 2026-27 में 66.50 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से अब तक 25.63 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग को 7 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान को 20 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इन प्रयासों से न केवल प्राचीन जलमग्न स्थलों की पहचान और संरक्षण होगा, बल्कि पुरातत्वविदों को प्रशिक्षण देने और जलमग्न स्थलों का सर्वेक्षण करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
अंतर्जलीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से संबंधित यह विषय न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका प्रत्यक्ष संबंध पर्यटन, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय गौरव से भी है। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से उम्मीदवारों की राष्ट्रीय महत्व के विषयों के प्रति जागरूकता और समझ का परीक्षण किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एएसआई द्वारा चलाए जा रहे अनुसंधान कार्य, आवंटित बजट, और चिन्हित स्थलों जैसे तथ्यों से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, इस विषय के माध्यम से उम्मीदवारों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और इसके संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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