प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ने हाल ही में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के 121वें वार्षिक सत्र में उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे भारतीय नवाचारों के व्यावसायीकरण में तेजी लाएं और वर्ष 2047 तक रणनीतिक संप्रभुता के लिए देश की तकनीकी क्षमताओं का विस्तार करें। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक उद्यमों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों में बदलने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और स्टार्टअप के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। मंत्री ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम-सुरक्षित संचार में 1,000 किलोमीटर का पड़ाव हासिल करने और जैव-अर्थव्यवस्था को 195 अरब अमेरिकी डॉलर से आगे बढ़ाकर 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्यों का उल्लेख किया, जो देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास को दर्शाते हैं। यह पहल बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) जैसे विषय शामिल हैं, जो वर्तमान में सरकार की प्रमुख नीतियों का हिस्सा हैं।
इस संदर्भ में, डॉ. सिंह ने अनुसंधान परियोजनाओं की शुरुआत से ही उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया, जिससे वैज्ञानिकों को बाजार की आवश्यकताओं को समझने और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करने में मदद मिल सके। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी जोर दिया, जो देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक संप्रभुता को मजबूत करेंगे। इन विषयों का परीक्षाओं में पूछा जाना लगभग तय है, क्योंकि ये सीधे तौर पर सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों से जुड़े हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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