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Ancient Marganatya tradition revived at 32nd GKCM Award Festival — labelled illustration

✎ मार्गनाट्य जैसी प्राचीन नाट्य परंपरा के पुनर्जीवन से भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति को संरक्षित किया जा रहा है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture

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**प्राचीन मर्गनाट्य परंपरा का पुनरुद्धार: 32वें जीकेसीएम पुरस्कार समारोह में**

ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 32वें गुरु केलुचरण मोहापात्र (जीकेसीएम) पुरस्कार समारोह के तीसरे दिन एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपलब्धि देखी गई, जब प्राचीन मर्गनाट्य परंपरा का पुनरुद्धार किया गया। यह परंपरा भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से जुड़ी हुई है और इसे ‘सौगंधिका आरणम’ नामक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया गया। श्री श्री विश्वविद्यालय, कटक और श्रीज्ञान गुरु केलुचरण मोहापात्र ओडिसी नृत्यालय के सहयोग से आयोजित इस पांच दिवसीय उत्सव में भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति का निर्देशन सांगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पियाल भट्टाचार्य ने किया, जिन्होंने नाट्यशास्त्र के नाट्य-धर्म परंपरा के आधार पर इस नाटक की रचना की। इसमें नृत्य, संगीत, वाद्य और अभिनय का समन्वय किया गया, जबकि कथानक 14वीं सदी के संस्कृत नाटक ‘विश्वनाथ कविराज’ के ‘सौगंधिका हरनम’ पर आधारित था, जिसमें भीम द्वारा द्रौपदी की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्गिक पुष्पों की खोज और हनुमान से उनकी मुलाकात को दर्शाया गया।

इस पुनरुद्धार का महत्व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं में भारतीय कला एवं संस्कृति से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इस घटना के माध्यम से उम्मीदवार न केवल प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र और मर्गनाट्य जैसे लुप्तप्राय कला रूपों के बारे में जान सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को भी रेखांकित

स्रोत: orissapost.com


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