✎ छोटे द्वीपीय देशों के लिए जलवायु परिवर्तन एक तत्काल खतरा है जिसके लिए न्यायपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की आवश्यकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: International Relations
संयुक्त राष्ट्र महासभा के चौथे दिन के दौरान छोटे द्वीपीय देशों के नेताओं ने जलवायु न्याय, समुद्र संरक्षण और वैश्विक एकजुटता की मांग की। तुवालू के प्रधानमंत्री फेलेती तेयो ने बताया कि समुद्र स्तर का बढ़ना एक वर्तमान सच्चाई है, जिससे उनकी राजधानी फुनाफुटी में बाढ़-रहित भूमि को पुनः प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप डेविस ने चेतावनी दी कि “समुद्र बातचीत नहीं करता, कोई संचार नहीं पढ़ता और वीटो को नहीं पहचानता।” उन्होंने जलवायु वित्त को न्याय बताया, दान नहीं। सेंट लूसिया के प्रधानमंत्री फिलिप जे. पियरे ने जलवायु परिवर्तन को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बताया, जबकि समोआ के उप प्रधानमंत्री मुलिपोला अनारोसा एल मोलीओ ने बिना शर्त और सुलभ जलवायु वित्त की मांग की। इन बिंदुओं का महत्व बैंकिंग और सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों के संदर्भ में पूछा जा सकता है, जैसे जलवायु वित्त, बहुपक्षवाद और छोटे द्वीपीय देशों की चुनौतियाँ।
महासागर संरक्षण और जल सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। तुवालू ने स्वयं को “विशाल समुद्री राज्य” बताया, जिसके पास केवल 26 वर्ग किलोमीटर भूमि है, लेकिन 7.5 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र है। मार्शल द्वीप समूह की राष्ट्रपति हिल्डा हाइन ने संयुक्त राष्ट्र से 1946-1958 के बीच हुए 67 परमाणु परीक्षणों के पीड़ितों से माफी की मांग की। मिस्र के प्रधानमंत्री मुस्तफा कमाल मडबौली ने नील नदी को जीवन रेखा बताया और जल सुरक्षा को अस्तित्व का मुद्दा बताया। इन मुद्दों का संबंध भू-राजनीति, वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका से है, जो आरबीआई ग्रेड बी, एसएससी और बैंक पीओ जैसी परीक्षाओं में प्रासंगिक हैं। जलवायु वित्त, बहुपक्षवाद और छोटे देशों की सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: news.un.org
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