
✎ उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और भावनात्मक अभिव्यक्ति की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**34% विद्यार्थियों ने महसूस किया बाहरीपन, 9% को आत्महत्या के विचार: एनटीएफ सर्वेक्षण**
हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार, 34% विद्यार्थियों ने स्वयं को बाहरी व्यक्ति महसूस किया, जबकि 9% ने आत्महत्या के विचार व्यक्त किए। आईआईटी-बॉम्बे और बीआईटी-मेसरा में हुए लगातार आत्महत्याओं के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थानों में भावनात्मक अभिव्यक्ति का अभाव, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं मुख्य कारण हैं। सर्वेक्षण में शामिल 2.43 लाख विद्यार्थियों में से 15% ने पिछले छह महीनों में अत्यधिक तनाव महसूस किया, जबकि 9% ने आत्महत्या के विचार व्यक्त किए। यह आँकड़ा बताता है कि केवल भौतिक उपायों जैसे पंखों को हटाना या सुरक्षा जाल लगाना पर्याप्त नहीं है; मानसिक स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
इस मुद्दे का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण निहितार्थ है। बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसी तरह का दबाव देखा जाता है, जहाँ कार्यभार और प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव बढ़ता है। इसी प्रकार, सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि लंबे समय तक तैयारी और असफलता का डर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी उम्मीदवारों को मानसिक रूप से सशक्त रहने की आवश्यकता होती है, क्योंकि परीक्षा का दबाव और उच्च पदों की जिम्मेदारी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसलिए, इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों को समझना न केवल शिक्षा क्षेत्र के लिए बल्कि समग्र रूप से समाज के लिए भी आवश्यक है।
स्रोत: The Indian Express
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