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सीएजी रिपोर्ट ने उजागर किया बीजेडी शासनकाल में डीएमएफ फंड में अनियमितताएं: बीजेपी

✎ CAG रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में बीजेडी शासनकाल के दौरान DMF फंड्स के लगभग 2,880 करोड़ रुपये का दुरुपयोग हुआ, जिसमें केवल केओंझर और सुंदरगढ़ में ही 983 करोड़ रुपये नियमों का उल्लंघन कर गैर-खनन क्षेत्रों में खर्च किए गए।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

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**हाल ही में Comptroller and Auditor General (CAG) की रिपोर्ट ने ओडिशा में बीजेडी सरकार के कार्यकाल के दौरान District Mineral Foundation (DMF) फंड के बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा किया है। बीजेडी प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने आरोप लगाया कि लगभग 2,880 करोड़ रुपये के DMF फंड का दुरुपयोग किया गया, जिसमें केवल केओंझर और सुंदरगढ़ जिलों में ही 983 करोड़ रुपये नियमों का उल्लंघन कर गैर-उद्देश्यीय कार्यों पर खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त, 119 करोड़ रुपये का ब्याज भी DMF फंड में नहीं जोड़ा गया, जबकि 507 करोड़ रुपये जाजपुर में खनन प्रभावित लोगों के हित में न होने वाले कार्यों पर खर्च किए गए। सुंदरगढ़ में 25 करोड़ रुपये का उपयोग कलेक्टर आवास में पढ़ने का कक्ष बनाने और नगरपालिका कार्यालय के विस्तार जैसे कार्यों पर किया गया। बीजेडी पर आरोप है कि उसने खनन कंपनियों से 775 करोड़ रुपये का राजनीतिक चंदा लिया, जिसमें 88% धनराशि खनन कंपनियों से प्राप्त हुई थी। यह रिपोर्ट बैंकिंग और SSC परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सरकारी फंड के प्रबंधन, लेखापरीक्षा प्रक्रिया, और शासन में पारदर्शिता जैसे विषय शामिल हैं, जो RBI Grade B और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। इसके अलावा, खनन क्षेत्र से संबंधित कानून जैसे MMDR Amendment Act का भी उल्लेख किया गया है, जो अर्थव्यवस्था और शासन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है।**

**इस मामले की प्रासंगिकता बैंकिंग और SSC परीक्षाओं में भी दिखाई देती है, जहां सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन, फंड के उपयोग, और लेखापरीक्षा रिपोर्टों के महत्व पर प्रश्न पूछे जाते हैं। RBI Grade B परीक्षा में भी सरकारी वित्तीय प्रणाली, लोक वित्त, और शासन संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे यह विषय उनके लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अतिरिक्त, SSC परीक्षाओं में भी सरकारी नीतियों, फंड के दुरुपयोग, और लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं, जो इस मामले से सीधे जुड़े हुए हैं। इस प्रकार, यह रिपोर्ट न केवल ओडिशा के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगी, बल्कि आने वाले समय में सरकारी फंड के प्रबंधन और पारदर्शिता पर भी बहस को तेज करेगी।**

स्रोत: orissapost.com


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