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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Society

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हाल ही में कर्नाटक में चुनावी सुधार प्रक्रिया (एसआईआर 2026) के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-7 (मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने वाला फॉर्म) दाखिल किए गए, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अनबू कुमार ने बताया कि अब तक किसी भी मामले में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा जांच शुरू नहीं की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पांच घंटे लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद सभी ईआरओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे जानबूझकर झूठे बयान देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। फॉर्म-7 भरने वालों को कानून के तहत दंडित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए पहले नियम 1960 के तहत जांच आवश्यक है। सीईओ ने स्पष्ट किया कि अब तक 91,278 फॉर्म-7 प्राप्त हुए हैं, जिनमें bulk आवेदन भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन किसी मतदाता का नाम केवल सुनवाई के बाद ही हटाया जाएगा।

यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, कानूनी प्रावधानों का पालन और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषय शामिल हैं। बैंकिंग क्षेत्र में ईसीजीसी, आईबीपीएस पीओ और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में चुनाव सुधार, मतदाता जागरूकता और प्रशासनिक निर्णय लेने से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसी प्रकार, एसएससी सीजीएल और सीएचएसएल जैसी परीक्षाओं में भी राजनीतिक प्रणाली, चुनावी कानून और समाज के विभिन्न वर्गों के अधिकारों से संबंधित टॉपिक्स पर ध्यान दिया जाता है। इस मामले में bulk फॉर्म-7 दाखिल करने के पीछे राजनीतिक हितों की संभावना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता जैसे बिंदु परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक हैं।

स्रोत: The Hindu


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