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आरबीआई रिपोर्ट: ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब मानसून पर कम निर्भर, जानें कैसे?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मानसून से मुक्तिमानसून पर निर्भरताकृषि उत्पादनसहायक गतिविधियाँगैर-कृषि आयसिंचाई कवरेजवर्षा निर्भरता घटानाआर्थिक विविधीकरणग्रामीण आय स्थिरता
ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मानसून से मुक्ति

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब मानसून के झटकों से कम प्रभावित हो रही है। आरबीआई के अनुसार, गैर-कृषि गतिविधियों, संबद्ध क्षेत्रों में विविधीकरण और बढ़ती सिंचाई सुविधाओं के कारण ग्रामीण आय अब बारिश की कमी से कम प्रभावित हो रही है। यह बदलाव 2026 में संभावित गंभीर मानसून की कमी के बीच सामने आया है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की रिपोर्ट में बताया गया है कि छोटे भूमिधारकों के लिए आय का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मजदूरी से आता है, जबकि फसल उत्पादन और पशुपालन मिलकर केवल 36 प्रतिशत योगदान देते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ग्रामीण आय अब केवल फसलों पर निर्भर नहीं है।

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 1994-95 से 2025-26 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि वृद्धि पर मानसून की कमी का प्रभाव कम हो रहा है, जबकि गैर-कृषि ग्रामीण गतिविधियों पर इसका असर लगभग नगण्य है। रिपोर्ट के अनुसार, सिंचाई कवरेज में वृद्धि, जलवायु-अनुकूल फसलों और कम जल-गहन फसलों की ओर विविधीकरण के कारण कृषि क्षेत्र की मानसून पर निर्भरता कम हुई है। यह बदलाव बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता और आर्थिक नीतियों के प्रभाव का पता चलता है।

स्रोत: Business Standard


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