प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
**सागरमंथन 2026** के शुभारंभ के साथ भारत ने वैश्विक समुद्री व्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने “स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और नियम-आधारित” समुद्री व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया, जो सभी राष्ट्रों के लिए शांति, समृद्धि और प्रगति सुनिश्चित करे। केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ प्रस्तुत कर भारत को वैश्विक समुद्री सहयोग का आधार-स्तंभ बनाने की दिशा तय की। इस दृष्टिकोण में ‘पीएम गतिशक्ति’, ‘सागरमाला’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल न केवल भारत के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिरता को भी सुदृढ़ करेगी।
इस सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ, संयुक्त अरब अमीरात और अफ्रीकी देशों सहित वैश्विक भागीदारों ने भाग लिया, जिससे समुद्री सुरक्षा, हरित शिपिंग और आपूर्ति शृंखला में लचीलेपन पर चर्चा हुई। ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत भारत विश्वस्तरीय जहाज निर्माण, कुशल कार्यबल और हरित समुद्री कॉरिडोर विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रहा है। यह पहल बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें ‘नीली अर्थव्यवस्था’, ‘सागरमाला’, ‘पीएम गतिशक्ति’ और भू-राजनीतिक गठजोड़ जैसे विषय शामिल हैं, जो वर्तमान में परीक्षाओं में बार-बार पूछे जा रहे हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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