✎ केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों से खतरों को कम करने के लिए सात-बिंदु रणनीतिक योजना प्रस्तुत की है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने राज्य में आक्रामक विदेशी प्रजातियों (आईएएस) से उत्पन्न खतरों को कम करने के लिए एक नीति दस्तावेज प्रस्तुत किया है। यह सात सूत्रीय रणनीतिक योजना राज्य सरकार को प्रस्तुत की गई है, जिसमें आक्रामक प्रजातियों के प्रसार की रोकथाम, निगरानी, सार्वजनिक जागरूकता, क्षमता निर्माण तथा वैज्ञानिक पहचान और वर्गीकरण पर जोर दिया गया है। बोर्ड के अध्यक्ष एन. अनिल कुमार ने बताया कि ये प्रजातियाँ तेजी से फैलती हैं, स्थानीय प्रजातियों को विस्थापित करती हैं तथा पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं। पूर्व वन अनुसंधान संस्थान निदेशक के.वी. संकरन ने इस मुद्दे के समाधान के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक विशेष कानूनी ढाँचा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है, क्योंकि अब तक आक्रामक प्रजातियों के कारण हुई जैव विविधता क्षति का कोई व्यापक अध्ययन नहीं किया गया है।
इस नीति दस्तावेज़ में आक्रामक मछलियों, पौधों तथा कीटों के राज्य के जल निकायों, वन तथा कृषि क्षेत्रों में व्यापक प्रसार का उल्लेख किया गया है। उदाहरण के लिए, मोज़ाम्बिक तिलापिया नामक आक्रामक मछली केरल की सभी ४४ नदियों, १८ जलाशयों तथा दो झीलों में पाई जाती है। इसी प्रकार, लैंटाना कैमारा तथा क्रोमोलाएना ओडोराटा जैसे पौधे वन पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं। इस संदर्भ में, बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय पर्यावरणीय स्थिरता, सरकारी नीतियों तथा अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता समझौतों (जैसे सीबीडी) से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, आक्रामक प्रजातियों के आर्थिक उपयोग तथा उनके नियंत्रण हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे भी वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में प्रासंगिक हैं।
स्रोत: The Hindu
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