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मुद्रास्फीति के द्वितीय दौर के प्रभाव: आरबीआई नीति और चुनौतियाँ
मुद्रास्फीति के द्वितीय दौर के प्रभाव: आरबीआई नीति और चुनौतियाँ — मुद्रास्फीति की दूसरी लहर: तीन माह पूर्वानुमान
आरेख: मुद्रास्फीति की दूसरी लहर: तीन माह पूर्वानुमान

✎ मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के प्रभावों के कारण आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति को कठोर बनाया तथा ब्याज दरों में वृद्धि की।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy

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मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के प्रभाव एक गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं, क्योंकि वैश्विक खाद्य कीमतें, जो ऊर्जा और धातुओं की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर थीं, अब तेजी से बढ़ रही हैं। एल नीनो के प्रभाव के कारण रबी फसलों पर संभावित असर से यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तिमाही घरेलू मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण में भी तीन महीने आगे के अनुमानों में 70 आधार अंकों की वृद्धि हुई है, जो 9.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे पता चलता है कि मुद्रास्फीति की उम्मीदें तेजी से बढ़ रही हैं, जो अर्थव्यवस्था में मूल्य दबावों के व्यापक होने का संकेत देती हैं। आरबीआई की अक्टूबर नीति में भी मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था, जिसमें नीति दर में वृद्धि और कैलिब्रेटेड सख्ती की स्थिति अपनाई गई थी।

बैंकिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं में मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के प्रभावों, आरबीआई की मौद्रिक नीति और मूल्य दबावों के व्यापक होने के कारणों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, एल नीनो के कारण फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव और वैश्विक खाद्य कीमतों में वृद्धि जैसे मुद्दे भी परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं। आरबीआई के सर्वेक्षण और नीति निर्णयों पर आधारित प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं, जिससे उम्मीदवारों को अर्थव्यवस्था की गतिशीलता और मौद्रिक नीति के प्रभावों की गहरी समझ हो सके।

स्रोत: The Indian Express


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