प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और एमएसएमईआर (MSMER) का संदिग्ध प्रत्याह्वान**
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा 2023 के मेडिकल शिक्षा मानकों के नियमन विनियम (MSMER) को निरस्त कर दिया गया है, जिससे चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षकों और प्रशासकों द्वारा गलत सूचना प्रस्तुत करने पर लगने वाले ₹5 लाख तक के जुर्माने के प्रावधान समाप्त हो गए हैं। हालांकि, एनएमसी के अधीनस्थ मेडिकल मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (MARB) को अभी भी संस्थानों पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है, लेकिन MSMER के निरस्त होने से संस्थानों के प्रति जवाबदेही कमजोर हुई है। यह कदम तब आया है जब मेडिकल शिक्षा में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी (जैसे ‘भूत संकाय’ और ‘भूत रोगी’) की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि पारदर्शिता का अभाव बरकरार है। MSMER के निरस्त होने का कारण स्पष्ट नहीं है, विशेषकर जब स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियम 2023 में व्यक्तिगत शिक्षकों पर जुर्माने का प्रावधान अभी भी मौजूद है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि क्या एनएमसी नियमन में ढील दे रहा है या प्रक्रियाओं को सरल बना रहा है।
इस निर्णय के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, विशेषकर बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से। बैंकिंग क्षेत्र में, जहां वित्तीय पारदर्शिता और नियामक अनुपालन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, ऐसे नियमों में ढील से संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। एसएससी परीक्षाओं में भारतीय संविधान और प्रशासनिक ढांचे से संबंधित प्रश्नों में इस तरह के मुद्दे प्रासंगिक हो सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में विनियामक ढांचे और नीतिगत निर्णयों के प्रभावों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यदि एनएमसी अपने निर्णयों को स्पष्ट नहीं करता है, तो यह माना जा सकता है कि नियामक ढांचे में कमजोरी आई है, जो समग्र प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रभावित कर सकती है।
स्रोत: The Hindu
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