प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमंत कुमार सिंह ने मंगलवार को कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और लैंगिक संवेदनशीलता को निरंतर प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने से अधिक समावेशी और नागरिक-अनुकूल पुलिस प्रणाली का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों को हर व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने और उन्हें accordingly संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि इसका मुख्य समाधान महिला कर्मियों की संख्या बढ़ाना है। यह बात उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु और कर्नाटक राज्य पुलिस द्वारा आयोजित ‘पुलिस संस्थानों में लैंगिक प्रशिक्षण को बढ़ाने’ विषय पर आयोजित संयुक्त गोलमेज सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कही। इस सम्मेलन में छह राज्यों के पुलिस अधिकारियों और प्रशिक्षण विशेषज्ञों के साथ बवेरियन राज्य पुलिस के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। श्री सिंह ने बताया कि बीते वर्ष में लगभग 20,000 बेंगलुरु पुलिसकर्मियों, कांस्टेबलों से लेकर इंस्पेक्टरों तक, को प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें एनएलएसआईयू का योगदान रहा। उन्होंने लैंगिक संवेदनशीलता को रोजमर्रा की पुलिसिंग में लागू करने के लिए बार-बार प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
कर्नाटक पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक एम.ए. सलीम ने अपने मुख्य भाषण में पुलिस व्यवहार में सुधार के लिए अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और निरंतर प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को महिलाओं और बच्चों द्वारा झेली जाने वाली हाशियाकरण की भावना के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यह सम्मेलन पुलिसिंग में लैंगिक समानता और सुधार के लिए नवाचारों और सीखों पर केंद्रित था, जो न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को भी सुनिश्चित करने में मदद करेगा। ऐसे प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस सुधारों और समावेशी शासन के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेंगे, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।
स्रोत: The Hindu
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