
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के मामलों की त्वरित सुनवाई हेतु फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष की अवधि (वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31) के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 01.04.2026 से 31.03.2031 तक इस योजना को जारी रखने की मंजूरी दी, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्रीय हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये निर्भया फंड से वित्त पोषित होगा। इस योजना में विभिन्न भागीदार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के संचालन का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए त्वरित सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना, लंबित मामलों को कम करना और बच्चों के अनुकूल तथा पीड़ित-केंद्रित वातावरण बनाना है।
यह निर्णय बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शासन और नीति निर्माण से संबंधित एक प्रमुख घटना है। उम्मीदवारों को इस योजना के वित्तीय परिव्यय, केंद्रीय और राज्य के हिस्से, निर्भया फंड के महत्व, एफटीएससी की संख्या में वृद्धि (वर्तमान 779 से 850 तक), और इसके प्रमुख प्रभावों जैसे त्वरित न्याय, लंबित मामलों में कमी, और बच्चों के अनुकूल वातावरण पर ध्यान देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, न्याय विभाग द्वारा कार्यान्वयन रणनीति, निगरानी और मूल्यांकन तंत्र, तथा इस योजना के प्राथमिक लाभार्थियों (महिलाएं और बच्चे) की जानकारी भी परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


2 comments on “फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना: त्वरित न्याय हेतु 5 वर्ष का विस्तार”