✎ महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना को 2,814 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना को हाल ही में 2,814 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। इस योजना के तहत, दो लिथियम और दो निकेल प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। यह योजना आयात निर्भरता को कम करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रॉनिकी, रक्षा तथा विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने लिथियम, निकल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ धातुओं सहित 24 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है, जिनकी घरेलू प्रसंस्करण क्षमताओं का विकास आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, विशेषकर 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की देश की प्रतिबद्धता को देखते हुए।
यह योजना बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार की आर्थिक नीतियों, औद्योगिक प्रोत्साहन और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को दर्शाती है। बैंकिंग परीक्षाओं में, यह योजना वित्तीय परिव्यय, सब्सिडी मॉडल और निवेश प्रवाह से संबंधित प्रश्नों के लिए प्रासंगिक हो सकती है, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में, यह मौद्रिक नीति, औद्योगिक विकास और आयात-निर्यात संतुलन पर इसके प्रभावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। एसएससी परीक्षाओं में, यह सामान्य जागरूकता, सरकारी योजनाओं और देश के आर्थिक विकास से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है, जो उम्मीदवारों को देश की वर्तमान आर्थिक प्राथमिकताओं और रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के हस्तक्षेप की समझ प्रदान करती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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