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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

भूमि संसाधन विभाग द्वारा गोवा में शुरू की गई ‘नक्शा’ पायलट परियोजना देश के भूमि अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संपत्ति संबंधी विवादों को समाप्त कर भूमि स्वामित्व को स्पष्ट एवं सुरक्षित बनाना है। गोवा के मार्गाओ, कुनकोलिम और पणजी जैसे शहरी क्षेत्रों में चल रही इस परियोजना में ड्रोन-आधारित मानचित्रण और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भूमि सीमाओं का सटीक मापन सुनिश्चित होता है। इस प्रक्रिया में ‘ग्राउंड-टूथिंग’ के माध्यम से वास्तविक भूमि सीमाओं का मिलान आधिकारिक अभिलेखों से किया जाता है, जिससे भविष्य में होने वाले सीमा विवादों की संभावना न्यूनतम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, परियोजना में अनुपस्थित मालिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक सत्यापन चक्र भी शामिल है, जिससे कानूनी स्वामित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

इस पहल का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यधिक है, क्योंकि यह ‘डिजिटल इंडिया’, ‘भूमि सुधार’ और ‘सुशासन’ जैसे विषयों से सीधे जुड़ा हुआ है। बैंकिंग क्षेत्र में भूमि अभिलेखों की डिजिटलीकरण प्रक्रिया से ऋण वितरण में पारदर्शिता आएगी, जिससे बैंकों को जोखिम मूल्यांकन में सहायता मिलेगी। एसएससी परीक्षाओं में भूमि संबंधी कानूनों, डिजिटल प्रशासन और सरकारी योजनाओं पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में भूमि सुधारों के आर्थिक प्रभावों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस प्रकार, ‘नक्शा’ परियोजना न केवल भूमि अभिलेखों को सुरक्षित बनाती है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण अध्ययन विषय है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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