प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत सरकार ने हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के माध्यम से ‘टेलीविज़न रेटिंग नीति, 2026’ जारी की है, जिसका उद्देश्य टीवी दर्शकों की मापन प्रणाली में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना है। इस नीति के तहत टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए नेटवर्थ की आवश्यकता 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है, जिससे नई कंपनियों के लिए बाज़ार में प्रवेश सरल होगा। इसके अतिरिक्त, मीटर लगे घरों की संख्या 50,000 से बढ़ाकर 80,000 कर दी गई है, जिससे नमूना आकार में वृद्धि होगी और आँकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। नीति में तीन वर्ष में एक बार ‘एस्टैब्लिशमेंट सर्वे’ कराने का प्रावधान किया गया है, जबकि व्यूअरशिप डेटा की गणना में ‘लैंडिंग पेज’ को शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही, सालाना स्वतंत्र ऑडिट, क्रॉस-होल्डिंग पर रोक, बोर्ड में 33% स्वतंत्र निदेशकों की अनिवार्यता तथा हितों के टकराव वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर विभिन्न स्तरों पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
यह नीति बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रशासनिक सुधार, नियामक ढाँचे तथा डेटा पारदर्शिता जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। नीति में शामिल तकनीकी-न्यूट्रल दृष्टिकोण, जहाँ कनेक्टेड टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म शामिल हैं, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को दर्शाता है, जो वर्तमान में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा, स्वतंत्र ऑडिट तथा जवाबदेही के प्रावधान प्रशासनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों को रेखांकित करते हैं, जो यूपीएससी एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। इस प्रकार, यह नीति न केवल मीडिया विनियमन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है,
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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