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भारत सरकार ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के अंतर्गत अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) को राष्ट्रीय परिवहन ढांचे का एक प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए व्यापक प्रयास शुरू किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वस्तरीय जलमार्ग अवसंरचना का निर्माण करना है, जिसमें बहुआयामी टर्मिनल, सामुदायिक जेट्टी, नदी क्रूज टर्मिनल, क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र तथा हरित पोत प्रौद्योगिकी शामिल हैं। आईडब्ल्यूएआई द्वारा पीएएनआई, जलयान और नाविक पोर्टल, सीएआर-डी तथा जल समृद्धि पोर्टल जैसे डिजिटल सुधारों के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों से 32 राष्ट्रीय जलमार्गों पर संचालन शुरू हो चुका है, जिससे रसद लागत में कमी, हरित गतिशीलता को बढ़ावा तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति मिल रही है। आईडब्ल्यूटी रेल और सड़क परिवहन की तुलना में काफी किफायती एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प है, जिसमें प्रति टन-किलोमीटर लागत मात्र 1.06 रुपये है, जबकि रेलवे में 1.36 रुपये तथा सड़क परिवहन में 2.50 रुपये है। इसके अतिरिक्त, आईडब्ल्यूटी के माध्यम से उत्सर्जन लागत भी न्यूनतम है, जो इसे सतत विकास के लिए आदर्श बनाता है।
इसके अलावा, सरकार द्वारा जलवाहक योजना, टन भार कर का विस्तार, राष्ट्रीय जलमार्ग विनियम 2025 तथा तटीय नौवहन अधिनियम 2025 जैसे नीतिगत उपायों के माध्यम से अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में एनडब्ल्यू-2 और एनडब्ल्यू-16 पर चल रही परियोजनाओं के साथ-साथ पीएसयू द्वारा माल ढुलाई में बदलाव को अनिवार्य किया गया है। तटीय कार्गो संवर्धन योजना के अंतर्गत 2047 तक आईडब्ल्यूटी की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 12% करने का लक्ष्य रखा गया है। ये
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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