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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

कल्पसर परियोजना गुजरात सरकार की एक महत्वाकांक्षी जल संसाधन पहल है, जिसमें खंभात की खाड़ी में बांध बनाकर दुनिया के सबसे बड़े तटीय मीठे पानी के जलाशयों में से एक का निर्माण प्रस्तावित है। इसके कार्यान्वयन से सौराष्ट्र क्षेत्र में जल की कमी काफी हद तक दूर होगी, क्योंकि यह मीठे पानी की उपलब्धता बढ़ाकर सिंचाई और अन्य उपयोगों के लिए भरोसेमंद जल स्रोत उपलब्ध कराएगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना में बांध के ऊपर प्रस्तावित राजमार्ग-सह-रेल कॉरिडोर से भावनगर और सूरत के बीच यात्रा दूरी लगभग 179 किमी कम हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार होगा और यात्रा समय में कमी आएगी। यह परियोजना न केवल जल संसाधनों के प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि परिवहन क्षेत्र को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इसके अलावा, इस परियोजना में उच्च ज्वार के दौरान जलमग्न भूमि पर लगभग 2,470 मेगावाट हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना है, जिसका उपयोग सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में सिंचाई के लिए मीठे पानी को पंप करने में किया जाएगा। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में, इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अंतिम चरण में है, जिसमें भारत-डच तकनीकी सहयोग के माध्यम से तटीय इंजीनियरिंग, हाइड्रोलिक मॉडलिंग, लवणता प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जा रहा है। यह सहयोग परियोजना की तकनीकी मजबूती को बढ़ाने और इसके कार्यान्वयन के दौरान विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायक होगा।

कल्पसर परियोजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और तकनीकी प्रगति बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना के माध्यम से जल संसाधनों के प्रबंधन और बुनियादी ढांचे

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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