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**डीएचएमएंड्रा प्रधान का रिपोर्ट कार्ड: शिक्षा सुधारों की दास्तान**
डीएचएमएंड्रा प्रधान के पांच वर्षीय शिक्षा मंत्रित्व काल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) २०२० को लागू करने के प्रयास तेज हुए, जिसे कैबिनेट द्वारा उनके पदभार ग्रहण करने से एक वर्ष पूर्व ही स्वीकृत किया गया था। इससे पूर्व पेट्रोलियम मंत्री के तौर पर उन्होंने तीन वर्षों में गरीब परिवारों को चार वर्ष के लक्ष्य के मुकाबले आठ करोड़ एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराकर कार्यान्वयन की क्षमता का प्रदर्शन किया था। शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफ), लचीली शिक्षा प्रणाली, बहुविषयक दृष्टिकोण, उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के स्थान पर विकसित भारत शिक्षा अभियान (वीबीएसए), पीएम श्री योजना, तीन-भाषा सूत्र और शिक्षक प्रशिक्षण पहलों जैसी पहलों को लागू किया गया। इन सुधारों का उद्देश्य प्रदर्शन मूल्यांकन एवं जवाबदेही, कौशल-शिक्षा एकीकरण, भारतीयता की एक निश्चित दृष्टि को बढ़ावा देना और समानता पर जोर देना था, हालांकि कार्यान्वयन में चुनौतियाँ भी रही। निपुण भारत अभियान के माध्यम से महामारी के दौरान हुई अधिगम क्षति को दूर करने का प्रयास किया गया, जिसके परिणामस्वरूप एएसईआर २०२४ में गणितीय कौशल में सात प्रतिशत सुधार देखा गया, किंतु राष्ट्रीय स्तर पर मात्र २५ प्रतिशत छात्र ही द्वितीय कक्षा के पाठ्यक्रम को पढ़ सके। शिक्षक मानकों के राष्ट्रीय पेशेवर मानकों (एनपीएसटी) और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (एनएमएम) जैसी पहलों के माध्यम से शिक्षकों के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया, किंतु जागरूकता की कमी और प्रभाव आकलन के अभाव में इनका लाभ सीमित रहा।
प्रधान के कार्यकाल में उच्च शिक्षा में बहुविषयकता को बढ़ावा देने के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में लचीलापन लाया गया, किंतु राज्यों द्वारा इन नवाचारों को अपनाने में देरी हुई। स्वायम प्ल
स्रोत: The Hindu
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