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भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है — concept mind map

✎ इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा का संतुलन सुनिश्चित करता है।

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इथेनॉल मिश्रण प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security

भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण के बीच एक संतुलन स्थापित करता है। यह कार्यक्रम वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के दौरान भारतीय उपभोक्ताओं को अत्यधिक मूल्य वृद्धि से बचाता है। उदाहरण के लिए, यदि पेट्रोल में इथेनॉल मिलावट नहीं होती, तो वैश्विक तेल कीमतों के चरम पर दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी, जबकि इथेनॉल मिलावट के कारण यह केवल 94.77 रुपये प्रति लीटर रही। इससे प्रति लीटर लगभग 30 रुपये की बचत हुई, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम ने विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है और 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात को प्रतिस्थापित किया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

ईबीपी कार्यक्रम किसानों के लिए भी लाभकारी सिद्ध हुआ है, क्योंकि इससे उन्हें अपने कृषि उत्पादों के लिए एक स्थिर बाजार मिला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी अनाजों को पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत उपयोग किया जाता है, और उसके बाद ही अधिशेष स्टॉक को इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमोदित किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि गरीबों के भोजन पर कोई असर नहीं पड़ता। इसके अलावा, इस कार्यक्रम ने 950 लाख मीट्रिक टन सीओ₂ उत्सर्जन में कमी लाई है और किसानों तथा डिस्टिलरियों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। इस प्रकार, ईबीपी कार्यक्रम न केवल ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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