✎ इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और किसान कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security
भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के दौरान उपभोक्ताओं को लगभग 30 रुपये प्रति लीटर की बचत कराई है, क्योंकि इथेनॉल मिलावट के कारण पेट्रोल की कीमतें नियंत्रित रहीं। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है और 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात को प्रतिस्थापित किया गया है। साथ ही, किसानों और डिस्टिलरियों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे कृषि क्षेत्र को स्थिर बाजार मिला। यह कार्यक्रम वैश्विक तेल संकटों के खिलाफ एक बीमा पॉलिसी के रूप में कार्य करता है, न कि केवल दिन-प्रतिदिन की मूल्य प्रतिस्पर्धा का साधन।
ईबीपी कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा खाद्यान्नों को पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और कल्याणकारी योजनाओं में उपयोग किया जाता है। उसके बाद ही अधिशेष और अपशिष्ट अनाजों का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न शामिल होते हैं, जिससे न केवल कचरे का निपटान होता है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय भी मिलती है। प्रधानमंत्री जीवन योजना के माध्यम से कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, जिससे खाद्यान्नों पर निर्भरता और कम हो रही है। इस प्रकार, ईबीपी कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक विषय है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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