✎ बहु-राज्यीय सहकारी समितियाँ अधिनियम 2023 सदस्यों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अनेक सुधार करता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
बहु-राज्यीय सहकारी समितियां (एमएससीएस) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियाँ अपने सदस्यों के प्रति उत्तरदायी होती हैं और स्वायत्त रूप से कार्य करती हैं। एमएससीएस (संशोधन) अधिनियम एवं नियम, 2023 के माध्यम से जमाकर्ताओं एवं सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु अनेक प्रावधान किए गए हैं, जिनमें सहकारी लोकपाल की नियुक्ति, सूचना अधिकारियों की नियुक्ति, समवर्ती लेखापरीक्षा प्रणाली, एकसमान लेखांकन मानकों का निर्धारण तथा शीर्ष सहकारी समितियों की लेखापरीक्षा रिपोर्टों को संसद में प्रस्तुत करने जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, गवर्नेंस में पारदर्शिता लाने के लिए बोर्ड के गैर-सर्वसम्मत निर्णयों का प्रकटीकरण, निदेशकों की अयोग्यता के अतिरिक्त आधार तथा हितों के टकराव वाले मामलों में उनकी भागीदारी पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं। बचत एवं ऋण कारोबार से जुड़ी सहकारी समितियों के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों (तरलता, जोखिम प्रबंधन) को लागू किया गया है तथा निधियों के सुरक्षित निवेश सुनिश्चित करने हेतु निवेश संबंधी प्रावधानों को पुनर्परिभाषित किया गया है। धोखाधड़ी या गैरकानूनी गतिविधियों की जांच के लिए केंद्रीय रजिस्ट्रार को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जबकि धोखाधड़ी से पंजीकरण कराने वाली समितियों के समापन हेतु उचित प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सदस्यों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए निष्कासित सदस्यों के निष्कासन की न्यूनतम अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया है।
इस अधिनियम के माध्यम से बहु-राज्यीय सहकारी समितियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सदस्यों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं, जो बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बैंकिंग क्षेत्र में सहकारी समितियाँ ग्राहकों की बचत एवं ऋण सुविधाओं से जुड़ी होती हैं, अतः उनके संचालन में पारदर्शिता एवं निय
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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