प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसे साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश भर में निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने आरबीआई को चार सप्ताह के भीतर ‘मूल बैंक खातों’ (म्यूल अकाउंट्स) से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया है। ये खाते साइबर फ्रॉड के माध्यम से प्राप्त धनराशि को स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा, अदालत ने सभी राज्यों को साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण और धन वापसी प्रणाली को तुरंत लागू करने, ई-जीरो एफआईआर तंत्र अपनाने तथा डिजिटल गिरफ्तारी पीड़ितों के लिए साझा देयता और मुआवजा ढांचे की जांच करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सरकार के प्रयासों से मामलों में कमी आई है, लेकिन निरंतर निगरानी आवश्यक है। पीठ ने तकनीकी ‘किल स्विच’ जैसे उपायों पर भी विचार किया, जिसमें लंबे समय तक चलने वाली वीडियो कॉल को स्वचालित रूप से समाप्त करने की सुविधा शामिल है।
यह मामला साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की चौथी स्थिति रिपोर्ट और महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस नप्पinai की ओर से प्रस्तुत नोट्स के आधार पर सुना गया। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतें 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 और 2026 की पहली छमाही में 16,377 रह गई हैं। इसी प्रकार, पीड़ितों को लगभग 18 करोड़ रुपये की धनराशि वापस की गई है। बैंकिंग परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि आरबीआई द्वारा तैयार की जाने वाली एसओपी म्यूल अकाउंट्स की पहचान और रोकथाम में मदद करेगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए
स्रोत: Hindustan Times
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