✎ वैश्विक आर्थिक बदलाव के कारण भारत को अपनी आर्थिक नीति में समायोजन करना होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर सी. रंगराजन ने हाल ही में भारत की नई आर्थिक नीति के 35 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक संघर्ष और टैरिफ (कराधान) के कारण भारत को अपनी आर्थिक नीति में पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने बताया कि कई देशों के बीच चल रहे संघर्ष और आयात पर लगाए गए उच्च टैरिफ के कारण भारत को उन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जहां महत्वपूर्ण वस्तुओं और रक्षा उत्पादों की आवश्यकता होती है। इसमें सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है, जो वैश्वीकरण के नियमों से थोड़ा हटकर हो सकता है, लेकिन वैश्विक स्थिति बदलने के कारण यह आवश्यक है।
इस व्याख्यान का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक है, क्योंकि इसमें आर्थिक सुधारों, वैश्वीकरण और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर चर्चा की गई है, जो इन परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। रंगराजन द्वारा सुझाए गए उपाय, जैसे रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता, सरकारी नीतियों और आर्थिक योजनाओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं। इससे परीक्षार्थियों को आर्थिक नीति निर्माण और उसके प्रभावों को समझने में मदद मिलेगी, जो उनके लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।
स्रोत: The Hindu
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