Madras High CourtContempt power✎ न्यायालय आदेशों का पालन सुनिश्चित करना न्यायिक प्रणाली की सफलता के लिए अनिवार्य है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**न्यायपालिका की अवमानना के प्रति बढ़ता उदासीनता का भाव: मद्रास उच्च न्यायालय**
मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा है कि अब वह दौर बीत गया जब न्यायालय की अवमानना शब्द सुनकर लोगों की रूह कांप जाती थी। न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि न्यायालय के आदेशों की अनुपालना अब इतनी सामान्य हो गई है कि अवमानना याचिकाओं की बाढ़ आ गई है, जो पहले दुर्लभ हुआ करती थीं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बीते बीस वर्षों में स्थिति में काफी बदलाव आया है। जहां पहले न्यायालय के आदेशों का पालन करना नियम था और अवमानना अपवाद, वहीं अब यह स्थिति उलट गई है। उन्होंने एक वरिष्ठ अधिवक्ता के हवाले से बताया कि उनके शुरुआती दिनों में अवमानना सुनवाई के दौरान न्यायालय कक्ष खचाखच भरे रहते थे, क्योंकि ऐसी सुनवाइयां दुर्लभ हुआ करती थीं। अब स्थिति इतनी खराब हो गई है कि न्यायालय को बार-बार अवमानना याचिकाओं से जूझना पड़ रहा है।
इस मामले में न्यायालय ने दो आईएएस अधिकारियों, एस.पी. अमृत और कृष्णा उन्नी को नोटिस जारी किया था, जिन्होंने सरकारी पशु चिकित्सा सहायक सर्जन ए. सेन्थिलकुमार के तबादले पर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश की अवमानना की थी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि सरकारी अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि अवमानना कार्यवाही में सरकारी अधिकारियों से त्वरित प्रतिक्रिया की अपेक्षा रहती है, किंतु इस मामले में अधिकारियों की लापरवाही स्पष्ट दिखाई दी। यह स्थिति न केवल न्यायपालिका की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति बढ़ते उदासीनता के भाव को भी दर्शाती है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि सरकारी तंत्र और नागरिक दोनों ही न्यायालय के आदेशों का सम्मान करें, ताकि कानून का शासन कायम रहे। यह विषय न केवल न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए भी प्रासंगिक है,
स्रोत: The Hindu
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