✎ अयोध्या में मंदिर भूमि अधिग्रहण मामले में राज्य द्वारा बकाया राशि चुकाने तथा न्यायालय के आदेशों का पालन करना आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने राम मंदिर विकास से जुड़े कार्य के लिए ‘सुग्रीव किल्ला’ मंदिर की भूमि पर कब्जा कर लिया, लेकिन तय राशि का भुगतान नहीं किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को न्यायमूर्ति अब्देश कुमार चौधरी और शेखर बी. सaraf की पीठ द्वारा दिए गए आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मंदिर को 1.21 करोड़ रुपये की बकाया राशि, साथ ही 8% वार्षिक ब्याज, एक राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यायालय के नाम पर सावधि जमा में जमा करे। यह आदेश मंदिर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने मंदिर से 1,512 वर्ग मीटर भूमि खरीदने का वादा किया था, जिसके लिए 1.38 करोड़ रुपये 15 दिनों के भीतर देने थे। सरकार ने दिसंबर 2023 में तुरंत कब्जा ले लिया, लेकिन बाद में केवल 1.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया। सरकार ने बाद में अपना रुख बदलते हुए दावा किया कि भूमि ‘नाजुल’ या सरकारी भूमि थी, हालांकि उसने बिक्री विलेख निष्पादित कर कब्जा कर लिया था।
न्यायालय ने राज्य सरकार के इस रवैये को ‘अनुचित, अनुचित या उचित नहीं’ बताया और कहा कि अधिकारियों ने मंदिर को धोखा दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह मालिकाना हक के विवाद पर निर्णय नहीं कर रहा, लेकिन सिविल मुकदमे को एक वर्ष के भीतर निपटाने का निर्देश दिया। यह मामला बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भूमि अधिग्रहण, सरकारी नीतियों, न्यायिक सक्रियता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। भूमि विवाद और सरकारी कार्यों के कानूनी पहलुओं को समझना इन परीक्षाओं के लिए आवश्यक है।
स्रोत: The Hindu
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