✎ वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर से बेदखल करने का अधिकार ट्रिब्यूनल को है, जिससे उनके सम्मान और सुरक्षा की रक्षा होती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता को अपने घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार है। अगर बेटे या बहू का व्यवहार उनके भरण-पोषण या सुरक्षा में बाधा बन रहा है, तो वे उन्हें घर से बेदखल कर सकते हैं। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि बढ़ती उम्र का मतलब अपमान या असुरक्षा नहीं है। कोर्ट ने माना कि समाज की सभ्यता इसी बात से तय होती है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसे व्यवहार करता है। लखनऊ के रवि कांत गुप्ता के मामले में सुनाए गए इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय को पलट दिया, जिसमें बेटे-बहू को घर से निकालने के अधिकार को अस्वीकार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा अधिनियम, 2007 के तहत ट्रिब्यूनल को जरूरत पड़ने पर बेदखली का आदेश देने का अधिकार है, क्योंकि कानून का उद्देश्य बुजुर्गों को उपेक्षा और असुरक्षा से बचाना है।
इस फैसले का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें संवैधानिक अधिकार, कानूनी प्रावधान और न्यायिक दृष्टिकोण जैसे विषय शामिल हैं। बैंक पीओ और एसबीआई जैसी परीक्षाओं में कानूनी जागरूकता के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें इस तरह के फैसले से संबंधित तथ्यों को समझना आवश्यक होता है। आरबीआई ग्रेड बी के लिए भी यह विषय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें नागरिकों के अधिकारों और सरकारी नीतियों के कानूनी पहलुओं की समझ की परीक्षा ली जाती है। इसके अलावा, यह फैसला समाज में बुजुर्गों के अधिकारों और उनके प्रति कर्तव्यों की समझ को भी बढ़ाता है, जो समसामयिक मामलों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्रोत: bhaskar.com
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