
✎ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पुरस्कारों के प्रवर्तन में अमेरिकी न्यायालयों की भूमिका और ISRO के व्यावसायिक हितों पर प्रभाव।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Science & Technology
**नोट:**
अमेरिकी अपीलीय न्यायालय ने भारतीय स्टार्टअप देवास मल्टीमीडिया को 565 मिलियन डॉलर (लगभग 4,700 करोड़ रुपये) के मुआवजे के पुरस्कार को बरकरार रखा है, जो इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्प के खिलाफ बड़ा झटका है। यह फैसला 2005 के उस उपग्रह समझौते से जुड़ा है, जिसमें इसरो ने देवास को 12 साल के लिए दो संचार उपग्रह पट्टे पर देने का वादा किया था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। अमेरिकी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी न्यायालय अमेरिका में संपत्ति जब्ती के आदेश नहीं दे सकते, भले ही पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता (ICC) द्वारा पारित किया गया हो। इस मामले में अमेरिकी न्यायालय की अधिकारिता पर भी बहस हुई, क्योंकि एंट्रिक्स ने दावा किया था कि मामला भारत में निपटाया जाना चाहिए था। न्यायालय ने यह भी माना कि विदेशी संप्रभु इकाइयों को मध्यस्थता से छूट नहीं मिल सकती, खासकर जब मामला अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) के तहत आता है।
यह मामला बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता, संप्रभु प्रतिरक्षा (सॉवरेन इम्युनिटी), और विदेशी न्यायालयों की अधिकारिता जैसे कानूनी मुद्दों पर प्रश्न उठते हैं। इसके अलावा, इसरो जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) से जुड़े विवादों का अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में निपटारा होने से सरकारी वित्तीय जोखिम और विदेशी निवेशकों के विश्वास पर भी असर पड़ता है। बैंकिंग परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मध्यस्थता कानून, और संप्रभु प्रतिरक्षा जैसे विषयों पर आधारित हो सकते हैं, जबकि एसएससी में सामान्य जागरूकता अनुभाग में इस तरह के मामलों से संबंधित तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। आरबीआई ग्रेड बी के लिए यह मामला वित्तीय प्रणाली में विदेशी निवेश और कानूनी जोखिमों के प्रबंधन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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