✎ पुरी मंदिर के रत्न भंडार की इन्वेंटरी 48 साल बाद हुई, जिसमें 1978 की सूची से मिलान हुआ और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
**पुरी मंदिर के ‘रत्न भंडार’ के वस्तुओं की सूची 1978 की सूची से मिलान हुई: अधिकारियों**
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ में चल रही वस्तुओं की सूचीकरण प्रक्रिया के दौरान अब तक मिली वस्तुएं 1978 में तैयार की गई सूची से पूरी तरह मेल खाती हैं। यह प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सीसीटीवी निगरानी और मजिस्ट्रेट तथा अधिकृत व्यक्तियों की उपस्थिति में पूरी की जा रही है। मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी, जो एक आईएएस अधिकारी हैं, ने बताया कि 25 मार्च से शुरू हुई इस प्रक्रिया में अब तक 1978 की सूची से वस्तुओं का मिलान किया गया है। उन्होंने कहा कि आंतरिक कक्ष में रखे गए तीन संदूकों की सूचीकरण के लिए अतिरिक्त एसओपी की आवश्यकता है, जिनके आकार के कारण उन्हें गिनना संभव नहीं था। इसके लिए ‘खाता सेजा घर’ में सूचीकरण किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वस्तुओं का 3डी मैपिंग, उच्च गुणवत्ता वाली फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के माध्यम से डिजिटल दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। पाधी ने बताया कि रत्न भंडार में प्रवेश से पहले और बाद में सभी अधिकृत व्यक्तियों की सख्त सुरक्षा जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि इस बार 1978 में 72 दिन लगे थे, जबकि इस बार तकनीक और रत्न विशेषज्ञों की मदद से अधिक सटीकता से काम किया जा रहा है। यह प्रक्रिया 1 सितंबर को भी जारी रहेगी। मंदिर प्रशासन ने नट मंडप में एयर कंडीशनिंग सुविधा भी स्थापित की है, ताकि भक्तों को गर्मी और उमस से राहत मिल सके।
**परीक्षा की दृष्टि से महत्व**
यह विषय मुख्य रूप से ‘कला एवं संस्कृति’ के अंतर्गत आता है, जो बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रमुख विषयों में से एक है। इस मामले में मंदिर के ‘रत्न भंडार’ की सूचीकरण प्रक्रिया से संबंधित जानकारी, विशेष रूप से इसकी पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी उपयोगिता
स्रोत: orissapost.com
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