✎ हिमाचल में एड्स नियंत्रण कर्मियों और आशा वर्करों के नियमितीकरण पर कोई नीति नहीं है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने स्पष्ट किया कि राज्य में एड्स नियंत्रण के लिए कार्यरत 414 कर्मचारियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। ये कर्मचारी 18 गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से साल-दर-साल के अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि सरकार ने उनके नियमितीकरण की संभावना से इनकार किया है। इसी प्रकार, आशा वर्करों के नियमितीकरण के लिए भी भविष्य में कोई नीति नहीं बनाई जाएगी, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार के मानदंडों के अनुसार प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन राशि दी जाती है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आशा वर्करों को विभागीय रिक्त पदों पर समायोजित करने का भी कोई विचार नहीं है, जिससे उनकी स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।
यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकारी नीतियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन एवं कर्मचारी नियमितीकरण जैसे विषय शामिल हैं। बैंक पीओ एवं एसएससी परीक्षाओं में लोक प्रशासन एवं नीति निर्माण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की नीतिगत अस्पष्टता एवं कर्मचारियों की अनिश्चित स्थिति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाती है, जो परोक्ष रूप से अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्वास्थ्य सूचकों से जुड़ी होती है।
स्रोत: amarujala.com
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