प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**हिंदी में नोट (प्राकृतिक परीक्षा हिंदी):**
संविधान के अनुच्छेद 124(3) के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त होने के तीन मार्ग निर्धारित हैं—पाँच वर्ष तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवा, दस वर्ष तक उच्च न्यायालय में वकालत, अथवा राष्ट्रपति की राय में “प्रख्यात विधिवेत्ता”। हालांकि, इस प्रावधान का अब तक कभी उपयोग नहीं किया गया है, जैसा कि न्यायमूर्ति उदयलाल भुयान ने हाल ही में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली के एलएलएम कार्यक्रम के 13वें दीक्षांत समारोह में बताया। संविधान सभा में इस प्रावधान को जोड़ने का उद्देश्य न्यायपालिका में विविध पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को शामिल करना था, जैसा कि अमेरिका में न्यायमूर्ति फेलिक्स फ्रैंकफर्टर के मामले से प्रेरित था। इस प्रावधान के माध्यम से कानून के विद्वानों को न्यायिक पदों तक पहुँच मिल सकती थी, जिससे न्यायिक दृष्टिकोण में व्यापकता आ सकती थी। हालांकि, न्यायालयीन प्रक्रिया के व्यावहारिक अनुभव की कमी और कानून के शिक्षकों द्वारा वकालत पर लगे प्रतिबंधों जैसे कारणों से इसका उपयोग सीमित रहा है।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें संवैधानिक प्रावधानों, न्यायिक नियुक्तियों और शासन प्रणाली की समझ पर प्रकाश डाला गया है। बैंकिंग परीक्षाओं में अक्सर संविधान, न्यायपालिका और शासन व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी में भी इसी प्रकार के विषयों पर प्रश्नों की संभावना रहती है। इस नोट के माध्यम से उम्मीदवार संविधान के अनुच्छेद 124(3) की गहन समझ प्राप्त कर सकते हैं, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इसके अतिरिक्त, न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित नवीनतम घटनाक्रमों पर अपडेट रहने से उम्मीदवारों को सामान्य जागरूकता अनुभाग में भी मदद मिल सकती है।
स्रोत: The Hindu
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