✎ हिमाचल सरकार ने रोपवे परियोजनाओं के लिए पीपीपी मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे निजी निवेश और राज्य की सीमित संसाधनों की चुनौती का समाधान हो सके।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मानसून सत्र के दौरान स्वीकार किया कि शिमला रोपवे परियोजना की अनुमानित लागत 2,700 करोड़ रुपये तक पहुंचने के कारण सरकार इसे आगे नहीं बढ़ा सकी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के पास सीमित संसाधन होने के कारण अब पीपीपी मॉडल के माध्यम से रोपवे परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में रोपवे की आवश्यकता तो है, लेकिन उनकी उच्च निर्माण और संचालन लागत के कारण निजी निवेशकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने वन संरक्षण अधिनियम जैसी बाधाओं का भी उल्लेख किया, जो कई परियोजनाओं में देरी का कारण बन रही हैं। सरकार ने निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने और अन्य सुविधाएं प्रदान करने का आश्वासन भी दिया है।
यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पीपीपी मॉडल, सरकारी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता, वन संरक्षण अधिनियम जैसी पर्यावरणीय कानूनी बाधाओं और राज्य सरकार की पूंजी-गहन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। पीपीपी मॉडल का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं के वित्तपोषण और निष्पादन में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को दर्शाता है, जो अर्थव्यवस्था और शासन के अध्यायों में पूछा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरणीय कानूनों और उनकी परियोजनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण पर्यावरणीय नीतियों और शासन के तहत पूछा जा सकता है, जिससे यह विषय बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान करता है।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

