✎ मद्रास उच्च न्यायालय ने अवमानना नोटिस जी-स्क्वायर द्वारा फेलिक्स जेराल्ड को आयोग कार्यालय में भेजने की अनुमति दी है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
मद्रास उच्च न्यायालय ने ११ सितंबर, २०२६ को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए रियल एस्टेट फर्म जी-स्क्वायर रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को तमिलनाडु अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष फेलिक्स जेराल्ड को उनके कार्यालय पर ही अवमानना नोटिस भेजने की अनुमति प्रदान की। न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू ने यह आदेश फर्म के वकील के अनुरोध पर दिया, क्योंकि पहले भेजा गया नोटिस चेन्नई के नुंगम्बक्कम स्थित उनके आवासीय पते पर लौटा था। इससे स्पष्ट होता है कि न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया के प्रति अपनी दृढ़ता बनाए रखते हुए नोटिस की वैध सेवा सुनिश्चित की। इस मामले की शुरुआत २०२२ में हुई जब जी-स्क्वायर ने यूट्यूबर ‘सवुक्कु’ शंकर पर मानहानिकारक बयान देने के आरोप में एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग करते हुए सिविल मुकदमा दायर किया था। न्यायालय ने २०२३ में अंतरिम आदेश पारित कर शंकर को कंपनी को नोटिस भेजने के बाद ही सार्वजनिक बयान देने का निर्देश दिया था, किंतु शंकर ने इसका पालन नहीं किया।
इस मामले का राजनीतिक और संवैधानिक महत्व भी है, क्योंकि इसमें न्यायालय द्वारा मीडिया और सोशल मीडिया पर लगाम लगाने का प्रयास दिखाई देता है। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय प्रशासनिक कानून, न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया विनियमन जैसे विषयों से जुड़ा है। बैंकिंग क्षेत्र में कानूनी अनुपालन और विवादों के निपटारे के तरीके महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि एसएससी में संवैधानिक निकायों और उनकी भूमिकाओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं। आरबीआई ग्रेड बी में भी न्यायिक निर्णयों के आर्थिक प्रभावों पर विचार किया जा सकता है। इस प्रकार, यह मामला न केवल कानूनी प्रक्रिया की बारीकियों को समझने में सहायक है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और मीडिया के प्रति न्यायपालिका के दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है।
स्रोत: The Hindu
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