✎ लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सांस्कृतिक तथा पर्यटन केंद्र बनेगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**सरबानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सोसायटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए लोथल में चल रही परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में बताया गया कि लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) परियोजना के पहले चरण (1ए) में 82 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परिषद ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत की पांच हजार वर्ष पुरानी समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करने और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया बताया। साथ ही, 13 देशों (पुर्तगाल, यूएई, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, ओमान, इज़राइल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इटली, न्यूजीलैंड और सिंगापुर) के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जबकि 35 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की योजना पर कार्य चल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का परिणाम बताया, जिन्होंने भारत की समुद्री विरासत को राष्ट्रीय नीति का केंद्र बनाया है।**
**इस परियोजना का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है। सर्वप्रथम, यह परियोजना भारत सरकार की सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे से संबंधित पहलों का एक प्रमुख उदाहरण है, जो सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल जैसे विषयों से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर जैसी परियोजनाएं पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर प्रभाव डालती हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का यह मामला वैश्विक कूटनीति, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विषयों से भी संबंधित है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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