✎ टी-बिल नीलामी सरकारी धन जुटाने और बाजार तरलता के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें विभिन्न परिपक्वता अवधि के लिए अलग-अलग कट-ऑफ दरें निर्धारित की जाती हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 16 सितंबर, 2026 को आयोजित 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय Tresury Bills (टी-बिल) की नीलामी में कुल मिलाकर ₹24,000 करोड़ की अधिसूचित राशि के विरुद्ध पूरी राशि स्वीकार की गई। 91-दिवसीय टी-बिल का कट-ऑफ मूल्य ₹98.7007 (YTM 5.2801%) रहा, जबकि 182-दिवसीय टी-बिल का कट-ऑफ मूल्य ₹97.2128 (YTM 5.7500%) और 364-दिवसीय टी-बिल का कट-ऑफ मूल्य ₹94.3200 (YTM 6.0386%) रहा। यह नीलामी सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से सार्वजनिक ऋण प्रबंधन के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य अल्पकालिक सरकारी धन की आवश्यकताओं को पूरा करना था। टी-बिल की इस नीलामी के परिणाम से बैंकिंग प्रणाली में तरलता प्रबंधन और सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार मूल्यांकन को समझने में सहायता मिलती है, जो बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
टी-बिल नीलामी के कट-ऑफ मूल्यों में आए उतार-चढ़ाव से सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार भाव पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने के निर्णयों को प्रभावित करता है। इसके अलावा, टी-बिल की ब्याज दरें (YTM) अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं, जो आरबीआई की मौद्रिक नीति और बाजार की भावना को दर्शाती हैं। बैंकिंग परीक्षाओं में इस प्रकार के वित्तीय उपकरणों की भूमिका, उनकी नीलामी प्रक्रिया और उनके प्रभावों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी सरकारी प्रतिभूतियों और टी-बिल से संबंधित अवधारणाओं पर आधारित प्रश्नों की संभावना रहती है
स्रोत: RBI
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