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Gender equality woefully off track, new UN report reveals — concept mind map
Map of Afghanistan, Saudi Arabia, India, United States, Sweden, Rwa highlighted on the map of India — gender equality…
मानचित्र व माइंड-मैप: लैंगिक समानता की स्थिति: वैश्विक रिपोर्ट 2026

✎ लैंगिक समानता के लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह से अधूरे हैं, संस्थानों का समर्थन जरूरी है।

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**लिंग समानता के मामले में प्रगति बेहद धीमी, नए संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट से खुलासा**

संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट ‘जेंडर स्नैपशॉट 2026’ के अनुसार, वर्तमान गति से लिंग समानता हासिल करने में 171 साल लग जाएंगे, क्योंकि संस्थाओं द्वारा समानता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को धन की कमी और कमज़ोर किया जा रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सतत विकास लक्ष्य 5 (एसडीजी 5) का कोई भी संकेतक 2030 तक पूरा होने की राह पर नहीं है। इसमें महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, हिंसा, बाल विवाह, महिला जननांग विकृति जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करना, राजनीतिक नेतृत्व में समान भागीदारी सुनिश्चित करना और आर्थिक अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार कम बनी हुई है, जहां सात में से छह देशों के नेता पुरुष हैं। चुनाव लड़ने की उच्च लागत और सार्वजनिक जीवन में हिंसा के कारण महिलाओं के लिए राजनीति में प्रवेश मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, रक्षा और वित्त जैसे शक्तिशाली मंत्रालयों में महिलाओं की हिस्सेदारी नगण्य है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और नीति निर्माण में उनके सीमित प्रभाव को दर्शाता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लाखों महिलाएं गंभीर हिंसा और भेदभाव का शिकार हैं, जिसमें 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों की संख्या लगभग पांच में से एक है और 23 करोड़ महिलाएं महिला जननांग विकृति की पीड़ित हैं। साथ ही, 31 करोड़ से अधिक महिलाओं ने अपने जीवनकाल में या पिछले वर्ष में अंतरंग साथी द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया है। कानूनी समानता के मामले में भी कोई देश पूरी तरह सफल नहीं हुआ है, जबकि 51 प्रतिशत देशों में महिलाओं के भूमि अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानूनी अंतराल मौजूद हैं। विकास सहायता में कटौती के कारण लिंग समानता के कार्यक्रमों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे संस्थाओं की क्षमता और प्रभाव कम हो रहा है। यह स्थिति न केवल सामाजिक न्याय के लिए चुनौती है, बल्कि आर्थ

स्रोत: news.un.org


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