✎ फिल्म महोत्सवों में सेंसर छूट प्रक्रिया कठिन होती जा रही है, जिससे राजनीतिक सामग्री वाली फिल्मों के प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
**सेंसर छूट अब फिल्म समारोहों और फिल्मकारों के लिए बाधा बन गई है**
फिल्म समारोहों में फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए सेंसर छूट की प्रक्रिया अब एक सामान्य प्रक्रिया से बदलकर फिल्म निर्माताओं और आयोजकों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। हाल ही में केरल के अंतर्राष्ट्रीय वृत्तचित्र और लघु फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) को 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग रद्द करनी पड़ सकती है, जिनमें से अधिकांश फिल्मों को राजनीतिक विषयों के कारण छूट नहीं मिली है। इससे पहले भी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव केरल (आईएफएफके) सहित कई छोटे-बड़े समारोहों में फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगाई गई है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया करीब एक दशक पहले तक सामान्य थी, जब फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की सूची और उनकी संक्षिप्त जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेजी जाती थी, जिसे बिना किसी आपत्ति के मंजूरी मिल जाती थी। अब मंत्रालय ने फिल्मों के स्क्रीनर्स (वीडियो लिंक) मांगने शुरू कर दिए हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है। 2016 में आईएफएफके में पहली बार सेंसर छूट से इनकार किया गया था, जब माजिद माजिदी की फिल्म ‘मुहम्मद: द मेसेंजर ऑफ गॉड’ और जयन चेरियन की ‘का बॉडीस्केप्स’ को राजनीतिक विषयों के कारण स्क्रीनिंग से रोका गया था।
**फिल्मकारों और समाज के लिए चिंता का विषय**
फिल्म निर्माता राकेश शर्मा, जिन्होंने गुजरात दंगों पर ‘फाइनल सॉल्यूशन’ फिल्म बनाई है, ने इस सेंसरशिप को निरर्थक बताया है। उनका कहना है कि फिल्म समारोहों में आम जनता के बजाय फिल्मकार, तकनीशियन, आलोचक और विद्यार्थी शामिल होते हैं, जिन्हें सरकार द्वारा तय किए गए विषयों को देखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पूछा कि सरकार को अन्याय, भेदभाव, लोकतंत्र और युद्ध जैसे विषयों पर बनी फिल्मों से क्या डर है? इसी बीच, केरल राज्य चलचित्र अकादमी ने मंत्रालय को पत्र लिखकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है, क्योंकि इन फिल्मों की स्क्रीनिंग रद्द होने से मह
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


1 comment on “फिल्म महोत्सवों के लिए सेंसर छूट: अब बन रहा रोड़ा, 31 फिल्में होंगी प्रभावित”