
✎ कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के तहत ईएसए क्षेत्रों को अधिसूचित वन तक सीमित करने के लिए कर्नाटक सरकार ने केंद्र से एक वर्ष का समय मांगा है।
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कर्नाटक विधानसभा और विधान परिषद ने 22 सितंबर, 2026 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र सरकार से पश्चिमी घाटों के संरक्षण पर आधारित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के अनुसार पहचाने गए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) को केवल अधिसूचित वनों तक सीमित रखने का आग्रह किया गया। राज्य सरकार ने केंद्र से ईएसए से संबंधित अधिसूचना को एक वर्ष तक स्थगित रखने और राज्य द्वारा भौतिक सर्वेक्षण पूरा करने तक निर्णय न लेने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि ईएसए के कारण किसानों और स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी, जिसमें एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में राजस्व और वन विभाग के अधिकारी, किसानों, उद्योगों और वन-पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए सुझाव देगी। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार इस समिति और भौतिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी तथा केंद्र द्वारा राज्य के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य पश्चिमी घाटों के निवासियों की चिंताओं को दूर करना है, जहां ईएसए के कारण कृषि भूमि, मानव बस्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं को भी शामिल किए जाने की आशंका है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईएसए से किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा और कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण में भी हस्तक्षेप करेगी। यह प्रस्ताव राज्य में ईएसए के दायरे को लगभग 20,668 वर्ग किमी से घटाकर 16,000 वर्ग किमी तक सीमित करने की मांग करता है, जिसमें केवल अधिसूचित वन क्षेत्र शामिल हों। इसके अतिरिक्त, प्रस्ताव में सरकारी भूमि अनुदान, बगैर हुकुम योजना और न्यायालयीन मामलों को ध्यान में रखने तथा प्रभावित किसानों को वैकल्पिक आजीविका
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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