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Resolution on Kasturirangan report alone will not help, says MLA for Karkala Sunil Kumar — concept mind map
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Kasturirangan report process

✎ कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भौतिक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक आधार आवश्यक है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

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**कर्नाटक विधानसभा में पश्चिमी घाट के मुद्दे पर उठे सवाल**

कर्नाटक विधानसभा में पश्चिमी घाट के लिए कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक वी. सुनील कुमार ने कहा कि केवल रिपोर्ट पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर देने भर से क्षेत्र के लोगों को न्याय नहीं मिल सकेगा। उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित गांवों का भौतिक सर्वेक्षण कराने की मांग की, ताकि कृषि, वन और अन्य क्षेत्रों का वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकरण किया जा सके। उन्होंने चेताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) राज्य के प्रस्ताव को खारिज कर सकता है और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के आदेश जारी कर सकता है। सुनील कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार को भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से भी वांछित परिणाम मिलने की संभावना कम है।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकारों ने 2013 से अब तक प्रभावित गांवों का भौतिक सर्वेक्षण कराने में समय बर्बाद किया है। उन्होंने कहा कि कस्तूरीरंगन समिति ने गाडगिल समिति की कई सिफारिशों को कमजोर कर दिया था। पाटिल ने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य मिलकर एनजीटी के समक्ष एक हल निकालने के लिए शपथपत्र दाखिल करें। वहीं, कांग्रेस विधायक टी.डी. राजे गौड़ा ने भी भौतिक सर्वेक्षण और प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक परिदृश्यों के बीच स्पष्ट सीमांकन की मांग की। राज्य सरकार के अनुसार, केंद्र सरकार के सातवें मraf्ट नोटिफिकेशन में कर्नाटक के 10 जिलों के 20,668 वर्ग किमी और 1,449 गांवों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।

**परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता**

बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए यह मुद्दा शासन व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रश्नों में उपयोगी है। पर्यावरणीय नीतियों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूम

स्रोत: The Hindu


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