
✎ आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों की जांच के लिए गठित शाह आयोग रिपोर्ट 1980 में गायब हो गई थी और 2026 में पुनः खोजी गई।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
नवंबर 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान किए गए अत्याचारों की जांच के लिए 1978 में शाह आयोग की स्थापना की गई थी। इस आयोग ने तीन खंडों में अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी, मीडिया पर सेंसरशिप और नागरिक स्वतंत्रताओं के दमन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, 1980 में जब इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में आईं, तो उन्होंने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास किया। सरकार द्वारा इसे वापस लेने के प्रयासों के कारण यह रिपोर्ट लंबे समय तक लुप्त रही। वर्ष 2010 में पूर्व सांसद राजगोपाल ‘एरा’ सेजियान ने अपने घर के पुस्तकालय से इस रिपोर्ट को पुनः खोज निकाला और इसे प्रकाशित किया। बाद में ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पुस्तकालय में भी इस रिपोर्ट की एक प्रति मिली। यह रिपोर्ट न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आई, बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में भी कार्य करती है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय शासन व्यवस्था, लोकतंत्र के मूल्यों और सत्ता के दुरुपयोग के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है। इन परीक्षाओं में आपातकाल के दौरान हुए अतिचारों, न्यायपालिका की भूमिका और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। साथ ही, इस रिपोर्ट के पुनः प्रकाशन से यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण होती है, जोकि बैंकिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी समान रूप से लागू होती है।
स्रोत: The Hindu
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