plutusacademy
Guarantee schemes trigger war of words in Karnataka’s Legislative Council — diagram
कर्नाटक में गारंटी योजनाओं पर विवादकांग्रेस सरकार (सत्तारूढ़)भाजपा (विपक्ष)गारंटी योजनाओं का प्रभावकृषि श्रमिकों की कमीअन्य कारणों पर जोरयोजनाओं की आलोचनाकृषि उत्पादन पर असरयोजनाओं की आवश्यकता पर सवालविवाद का कारणयोजनाओं का विस्तारयोजनाओं की लागत एवं प्रभावबयान देने वालेपूर्व सभापति बसवराज होरattiभाजपा सदस्य
कर्नाटक में गारंटी योजनाओं पर विवाद

✎ गारंटी योजनाओं से ग्रामीण श्रमिकों की कमी और युवाओं के रोजगार पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो रहा है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

**कर्नाटक विधान परिषद में गारंटी योजनाओं पर हुई तीखी बहस**

कर्नाटक विधान परिषद में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के बीच राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं को लेकर तीखी बहस हुई। पूर्व परिषद अध्यक्ष बसवराज होराट्टी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि श्रमिकों की कमी हो गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें स्वयं 80 गायों का पालन करना पड़ता है, लेकिन योजनाओं के लागू होने के बाद मजदूरों की कमी से पशुओं की देखभाल और दूध आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि कपास उत्पादकों को भी फसल कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। होराट्टी ने युवा निधि योजना का भी जिक्र करते हुए कहा कि बेरोजगार युवाओं को वित्तीय सहायता देने के साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए, अन्यथा वे गलत रास्ते अपना सकते हैं।

कांग्रेस सदस्यों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि गृह लक्ष्मी योजना के तहत महिला मुखिया को दी जाने वाली ₹2,000 की सहायता राशि दान नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों ने भी इसी तरह की कल्याणकारी योजनाओं को अपनाया है। होराट्टी ने मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका लाभ केवल गरीब महिलाओं को मिलना चाहिए, न कि उन लोगों को जो इसे वहन कर सकते हैं। उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों को मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं को वापस लेने की भी मांग की। लघु उद्योग मंत्री विजयनंद काशप्पनावर ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पहले ही इन योजनाओं की समीक्षा करने के निर्देश दे चुके हैं। इस बहस से यह स्पष्ट होता है कि कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि उनके दूरगामी प्रभावों पर ध्यान दिया जा सके।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites