
✎ सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ₹7,86,000 करोड़ बाजार से उधार लेगी, जिसका वितरण 23 नीलामियों और विभिन्न अवधि वाली प्रतिभूतियों के माध्यम से किया जाएगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ विचार-विमर्श कर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2026 से मार्च 2027) के लिए ₹7,86,000 करोड़ की बाजार उधारी की योजना बनाई है। यह उधार 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें विभिन्न परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियाँ (3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष) शामिल होंगी। 10-वर्षीय प्रतिभूतियों का हिस्सा सबसे अधिक (26.3%) होगा, जबकि कुल वार्षिक उधारी बजट अनुमान ₹17,20,000 करोड़ के मुकाबले ₹15,99,506 करोड़ रहने की संभावना है। सरकार ने प्रतिभूतियों के प्रतिदान प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अदला-बदली/वापसी जारी रखने के साथ-साथ नीलामी में ग्रीनशू विकल्प का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखा है। इसके अतिरिक्त, तीसरी तिमाही में प्रति सप्ताह ₹23,000 करोड़ के ट्रेजरी बिल (91, 182 और 364 दिन) जारी किए जाएँगे, जबकि आरबीआई ने सरकारी खातों में तरलता प्रबंधन के लिए वेज एंड मीन एडवांस (डब्ल्यूएमए) की सीमा ₹50,000 करोड़ निर्धारित की है।
इस योजना का बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से उधारी बाज़ार में तरलता, ब्याज दरों और सरकारी ऋण के बोझ पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालती है। बैंक पीओ एवं एसबीआई परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न, जैसे सरकारी उधारी के तरीके, प्रतिभूतियों की परिपक्वता अवधि या आरबीआई की भूमिका, पूछे जा सकते हैं। इसी प्रकार, आरबीआई ग्रेड बी एवं एसएससी परीक्षाओं में भी सरकारी वित्तीय प्रबंधन, राजकोषीय नीति और मुद्रा बाज़ार के तंत्र पर आधारित प्रश्नों के लिए यह विषय प्रासंगिक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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