✎ कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका में विविधता और क्षमता वृद्धि का संकेत है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने बेंगलुरु के राजभवन स्थित ग्लास हाउस में आयोजित एक समारोह में शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के तीन नए न्यायाधीशों — न्यायमूर्ति उषारानी, कुरुबा शांतप्पा भारथ कुमार और नेराले वीराभद्रय्या भावनी — को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। ये तीनों न्यायिक अधिकारी जिला न्यायपालिका से पदोन्नत होकर उच्च न्यायालय में शामिल हुए हैं। न्यायमूर्ति उषारानी कर्नाटक लोकायुक्त की रजिस्ट्रार तथा हासन और मैसूर की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं, जबकि न्यायमूर्ति भारथ कुमार ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और बेंगलुरु के प्रधान नगर सिविल एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। न्यायमूर्ति भावनी पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश एन.एस. वीराभद्रय्या की पुत्री हैं और इससे पूर्व कर्नाटक सरकार के विधि, न्याय एवं मानवाधिकार विभाग की प्रमुख सचिव रह चुकी हैं।
यह नियुक्ति न्यायपालिका में विविधता और अनुभव को बढ़ावा देने के साथ-साथ उच्च न्यायालयों में न्यायिक पदों की रिक्तियों को भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैंक पीओ, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस तरह की नियुक्तियाँ संविधान के अनुच्छेद 217 (उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति) तथा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) जैसे विषयों से संबंधित होती हैं। इसके अतिरिक्त, न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की बढ़ती भूमिका भी समानता एवं सशक्तिकरण जैसे मुद्दों के साथ जुड़ी हुई है, जो परीक्षाओं में करेंट अफेयर्स के रूप में पूछा जा सकता है। साथ ही, राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाना राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका को भी रेखांकित करता है, जो पीसीएस, एसएससी सीजीएल एवं आरबीआई ग्रेड बी के सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम में शामिल है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

