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AI Sanskrit Heritage Model launched at Madras Sanskrit College — concept mind map
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AI Sanskrit Heritage Model

✎ AI संस्कृत विरासत मॉडल संस्कृत साहित्य को डिजिटल रूप से संरक्षित और वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में सहायक है।

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**AI संस्कृत विरासत मॉडल का मद्रास संस्कृत कॉलेज में शुभारंभ**

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को चेन्नई स्थित मद्रास संस्कृत कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कवि कालिदास जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं तक आम लोगों की पहुंच बनाने के लिए एआई तकनीक का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और ताम्रपत्रों के आधार पर भारतीय भाषाओं—जैसे संस्कृत और तमिल—के प्रसार की सीमा को पहचानने में भी किया जा सकता है। सीतारमण ने कहा कि ऐसी पहलें हमारे साहित्यिक खजानों को दुनिया भर में कहीं भी, कभी भी सुलभ बना सकती हैं। उन्होंने मद्रास संस्कृत कॉलेज की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्थान ने कठिन दौर में भी अपनी गरिमा बनाए रखी है और संस्कृत ज्ञान के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि संस्कृत की संरचित प्रकृति इसे तकनीक के अनुकूल बनाती है, जिससे भविष्य में इसका डिजिटलीकरण और विस्तार संभव हो सकेगा।

मद्रास संस्कृत कॉलेज के निदेशक रमेश महालिंगम ने बताया कि वर्ष 2017 में डिजिटल दुनिया में कदम रखने वाले इस संस्थान ने अब तक 20,000 लोगों को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान देश का पहला ऐसा संस्थान बनने जा रहा है, जिसके पास एआई संचालित ज्ञान मॉडल होगा। आर्टीकुल8 एआई के संस्थापक एवं सीईओ अरुण सुब्रमण्यन ने बताया कि संस्कृत में पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी जैसी व्याकरणिक संरचना इसे कंप्यूटेशनल भाषा बनाती है, जिससे हर शब्द निर्माण के नियमों को एआई मॉडल में एन्कोड किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में हर प्रतिक्रिया को उसी तंत्र द्वारा उत्पन्न और सत्यापित किया जाता है, जिससे शोधकर्ताओं को सटीक परिणाम मिल सकें। यह मॉडल भविष्य में अन्य भारतीय भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे भाषाई एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हो सके।

स्रोत: The Hindu


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